पुराण विषय अनुक्रमणिका

PURAANIC SUBJECT INDEX

(From Mankati  to Mahaadhriti )

Radha Gupta, Suman Agarwal & Vipin Kumar

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Makara - Mangala ( Makara, Makha, Magadha, Magha, Mankana, Mankanaka, Manki, Mangala.)

Mangalachandi - Manikarnikaa  ( Mangalaa, Mani / gem, Manikarnikaa etc.)

Manikundala - Manduuka ( Manibhadra, Mandapa, Mandala, Manduuka / frog etc.)

Matanga - Matsyendranaatha  ( Matanga, Mati / intellect / intention, Matsya / fish etc.)

Matsyodari - Madanasundari ( Mathana, Mathuraa, Mada, Madana etc.)

Madanasundari - Madhu ( Madayanti, Madaalasaa, Madiraa / wine, Madra, Madhu / honey etc.)

Madhu - Madhya ( Madhu, Madhu-Kaitabha, Madhuchchhandaa, Madhusudana, Madhya / middle etc.)

Madhyandina - Manasvini (Madhyama / middle, Mana / mind, Manasaa etc.)

Manu - Manonuga ( Manu, Manojava etc. )

Manobhadra - Manahswaami ( Manoratha / wish, Manoramaa etc.)

Mantra - Manda ( Mantra, Manthana / stirring,  Mantharaa, Manda / slow etc.)

Mandagaa - Mandodari ( Mandara, Mandaakini, Mandira / temple, Mandehaa, Mandodari etc.)

Mandodari - Maya (Manthana / stirring, Manmatha, Manvantara, Mamataa, Maya etc. )

Mayuukha - Maru (  Mayuura / peacock, Mareechi, Maru etc. )

Maruta - Marudvati ( Maruta, Marutta etc.)

Marudvridhaa - Malla ( Marka, Markata / monkey, Maryaadaa / limit, Mala / waste, Malaya, Malla / wrestler etc. )

Mallaara - Mahaakarna ( Maha, Mahat, Mahaa etc. )

Mahaakaala - Mahaadhriti ( Mahaakaala, Mahaakaali, Mahaadeva etc. )

 

 

 

 

 

 

Puraanic contexts of words like Mangalaa, Mani / gem, Manikarnikaaetc. are given here.

मङ्गलचण्डी देवीभागवत .४७(मङ्गलचण्डी द्वारा त्रिपुर दैत्य के वध में शिव की सहायता, शिव द्वारा स्तुति, मङ्गलचण्डी के ध्यान का स्वरूप), ब्रह्मवैवर्त्त ..८६(प्रकृति के प्रधानांशों में से एक देवी मङ्गलचण्डी के गुणों का कथन), .४४(मङ्गलचण्डी स्तोत्र ) mangalachandee/ mangalachandi 

मङ्गला देवीभागवत .३८.२४(मङ्गला देवी की गया क्षेत्र में स्थिति), नारद .९१.६४(ईशान शिव की द्वितीय कला), पद्म .५१.४५(शिवशर्मा द्वारा स्वभार्या मङ्गला को भिक्षुणी रूप में आई पूर्व पत्नी सुदेवा का सत्कार करनेv का निर्देश), .५२.(शिवशर्मा द्वारा मङ्गला को पूर्व - पत्नी सुदेवा के विषय में बताना), ब्रह्म .५२.९४/१२२(मङ्गला नदी की इन्द्र के अभिषेक जल से उत्पत्ति), मत्स्य १३.३५(गङ्गा में देवी का मङ्गला नाम), १७९.२१(अन्धकासुर के रक्त पानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक), वायु १०६.५८/.४४.५८(मङ्गलागौरी : गया में शिला को स्थिर करनेv के लिए शिला पर स्थित देवियों में से एक),स्कन्द ..७९.१०२(मङ्गलदायी मङ्गला पीठ का उल्लेख), ..९७.१८६(मङ्गला गौरी की प्रदक्षिणा का माहात्म्य), ..१९८.७२(शूलमूलाग्र से नि:सृत उमा देवी की पुरुषोत्तम क्षेत्र में मङ्गला नाम से स्थिति का उल्लेख), ..६०(प्रभास क्षेत्र की दूतियों में से एक, ब्राह्मी देवी का रूप, माहात्म्य), लक्ष्मीनारायण ..११(बालकृष्ण के दुग्धपान हेतु मङ्गलागौरी नामक गाय को दुहने का उल्लेख), .२९७.९१(मङ्गलादि पत्नियों के गृह में कृष्ण द्वारा केश साधन का उल्लेख), .१०१.८५(कृष्ण  - पत्नी मङ्गला के पुत्र प्रभासक पुत्री भास्वरा का उल्लेख), कथासरित् ..१७७(तुम्बुरु - कन्या मङ्गलावती के सुनीथ की भार्या बनने का उल्लेख ) mangalaa 

मङ्गु ब्रह्माण्ड ..७१.१११(उपमङ्गु मङ्गु : श्वफल्क गान्दिनी के पुत्रों में ), वायु ९६.११०/.३४.११०(वही) mangu 

मज्जा गरुड .२२.५९(मज्जा में शाक द्वीप की स्थिति का उल्लेख), .२२.६१(मज्जा में घृत सागर की स्थिति का उल्लेख), पद्म ..२७(, ब्रह्माण्ड ..४४.९०( वर्ण की शक्ति के रूप में मज्जा का उल्लेख), भविष्य .६९.३७(गौ के शरीर में देवताओं की स्थिति के संदर्भ में मज्जा में क्रतुओं की स्थिति का उल्लेख ) majjaa 

मञ्जरी स्कन्द ...३४(आम्र मञ्जरी से उर्वशी के जन्म का कथन ), द्र. चम्पकमञ्जरी, मदनमञ्जरी manjaree/ manjari

मञ्जीर देवीभागवत .१९.२४(स्वाहा से आहृत मञ्जीर युग्म की तुलसी को प्राप्ति) manjeera 

मञ्जुघोषा पद्म .४६.१४(मञ्जुघोषा अप्सरा का मेधावी मुनि के साथ विहार, शाप प्राप्ति), ब्रह्माण्ड ..३३.१९(ललिता देवी का ध्यान करनेv वाली अप्सराओं में से एक), भविष्य ...५८(मेधावी मुनि मञ्जुघोषा से भगशर्मा पुत्र की उत्पत्ति), लक्ष्मीनारायण .२४६.४९(मेधावी मुनि द्वारा मञ्जुघोषा अप्सरा के साथ भोग शाप दान की कथा), .७८.२६(मञ्जुघोषा अप्सरा द्वारा सुचन्द्रिका गोपी से स्वर्गप्राप्ति का कारण ज्ञात करना ) manjughoshaa 

मञ्जुमती कथासरित् १२..३४(मायाबटु भिल्लराज की पत्नी, प्रतीहार द्वारा हानि पंहुचाने की चेष्टा )

मञ्जुलकेश लक्ष्मीनारायण .१८५(कृष्ण को सर्वस्व अर्पण करनेv वालेv भक्त मञ्जुलकेश की कथा), 

मञ्जुला लक्ष्मीनारायण .२८३.५८(मञ्जुला द्वारा बालकृष्ण को केयूर देने का उल्लेख), .२०५.३३(वात्सल्यधीर भक्त की पतिव्रता पत्नी मञ्जुलिका की भक्ति से प्रसन्न साधु द्वारा चतुर्भुज रूप के दर्शन देना), .१०१.१२६(कृष्ण - पत्नी मञ्जुला की पुत्री मातङ्गिनी पुत्र महेश्वर का उल्लेख ) manjulaa 

मणि अग्नि २४६(रत्न लक्षण के संदर्भ में विभिन्न प्रकार की मणियों के नाम), २६७.११(माहेश्वर स्नान के संदर्भ में हाथ में मणि बन्धन हेतु अक्रन्दयति सूक्त का निर्देश), गरुड .७१(मरकत मणि की उत्पत्ति महिमा), देवीभागवत .२०.१६ (महिषासुर वध के पश्चात् देवी का वास  स्थान मणिद्वीप), १२.१०+ (मणिद्वीप का वर्णन), नारद .२०.(धर्माङ्गद द्वारा मलय पर्वत पर पांच विद्याधरों को जीतकर पांच दिव्य मणियां प्राप्त करना, मणियों की दिव्यता का वर्णन), पद्म .२५.(मणिमान् तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य : अग्निष्टोम फल की प्राप्ति), ..२५(बल असुर के अस्थि कणों से षट्कोणीय मणियों की उत्पत्ति का उल्लेख), ब्रह्मवैवर्त्त ..४७(नख सौन्दर्य हेतु मुनीन्द्रनाथ को मणीन्द्रसार लक्ष दान का उल्लेख), ब्रह्माण्ड ..२९.७४(चक्रवर्तियों के प्राणहीन रत्नों में से एक), ...३७ (काद्रवेय नागों में से एक), भविष्य ..१०(विष्णुशर्मा द्वारा पारसमणि के तिरस्कार की कथा), वराह ११(राजा दुर्जय के सत्कार हेतु गौरमुख मुनि द्वारा मणि प्राप्ति, दुर्जय द्वारा मणि प्राप्ति की चेष्टा निधन का प्रसंग), ७९.१४(मणि शैल पर स्थित वनों की शोभा का कथन), १४८.४४(मणिपूर गिरि तथा उस पर स्थित विष्णु तीर्थों का माहात्म्य, विष्णु का नाम स्तुतस्वामी), वामन ५७.६४(चन्द्रमा द्वारा स्कन्द को मणि नामक गण प्रदान करना), ९०.(मणिमती ह्रद में विष्णु का शम्भु नाम से वास), वायु ५७.६८(चक्रवर्तियों के प्राणहीन रत्नों में से एक), ६९.७४/..७१(काद्रवेय नागों में से एक), ७८.५३/.१६.५३(मणि आदि द्रव्यों की सिद्धार्थ या तिल कल्क से शुद्धि होने का उल्लेख), विष्णु ..(पाताल में नागों के आभूषणों के रूप में मणियों का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर .१०९(मणियों के प्रकार, कल्पन, बन्धन), .१३२.१८(शान्ति हेतु मणि द्रव्य), शिव .१७.(चन्द्रसेन राजा को मणिभद्र द्वारा दत्त मणि का वर्णन), स्कन्द ...२२(ब्रह्मा द्वारा मणिमय लिङ्ग की पूजा का उल्लेख), ....(कृतयुग में अग्निमय/शोण शैल के त्रेता युग में मणि पर्वत तथा अन्य युगों में अन्य नामों  का उल्लेख), ..६८.८१(विष व्याधिहारक, सुख सौभाग्य दायक मणिकुण्ड का उल्लेख), ..४४.२४(समुद्र मन्थन से प्राप्त कौस्तुभ मणि विष्णु को देने का उल्लेख), हरिवंश .६४.२२ (मणियुक्त मणिपर्वत के शिखर को कृष्ण द्वारा उखाड कर द्वारका ले जाने की कथा), .९९.२२(कृष्ण द्वारा मणिपर्वत को अन्त:पुर में रखना), महाभारत आश्वमेधिक ८०.४२(सञ्जीवन मणि से अर्जुन के जीवित होने का वृत्तान्त), योगवासिष्ठ ..८८(साधक द्वारा अनायास प्राप्त वास्तविक मणि की उपेक्षा कर काच मणि को वास्तविक समझने का वर्णन), ..९०.१९(तप की कांच मणि से उपमा), वा.रामायण .६६(सीता द्वारा अभिज्ञान रूप में हनुमान को दत्त मणि के दर्शन से राम का विलाप), लक्ष्मीनारायण .५८१.४३१(मधु कैटभ द्वारा कृष्ण के ह्रदय से मणि लेकर नीलपर्वत पर रखने पृथिवी द्वारा सदैव रक्षा करनेv की कथा), .७७.४४(कृष्ण मणि दान से ननादि के पाप के निवारण का उल्लेख), .२०२(श्रीहरि के मणिपत्तन में स्वागत व भ्रमण का वर्णन), .२२५.९६(दैत्यों को मणि दान का उल्लेख), .३३.८६(माणेय : मेरु के पूर्व - उत्तर में स्थित पर्वतों में से एक, पक्षवान् पर्वतों में से एक), .२६.५७(माणिकीश कृष्ण की शरण से काम से मुक्ति का उल्लेख), कथासरित् १२..७६(मणिदत्त वणिक् द्वारा लाए गए अश्वरत्न को प्राप्त करनेv के लिए भीमभट समरभट में युद्ध की कथा), १२.२८.(मणिवर्मा वणिक् द्वारा अनङ्गमञ्जरी को पत्नी रूप में प्राप्त करना, पत्नी पत्नी के प्रेमी को मृत देखकर मणिवर्मा की भी मृत्यु की कथा), १७..६०(मणिपुष्पेश्वर गण द्वारा चन्द्रलेखा कुमारी का अभिलाषापूर्ण अवलोकन करनेv पर देवी से शाप प्राप्ति ), द्र. चिन्तामणि, चूडामणि, महामणि, वसुमणि, वीरमणि, स्यमन्तकमणि mani 

मणि- ब्रह्माण्ड ..१४.१७(मणीवक : हव्य के शाकद्वीप के अधिपति पुत्रों में से एक), ..१९.९२(श्याम पर्वत के मणीवक वर्ष? नाम का उल्लेख), ..२०.३०(तृतीय तल में मणिनाग के पुर की स्थिति का उल्लेख), ...३६(मणिस्थक : काद्रवेय नागों में से एक), ...१२३(मणिमन्त : पुण्यजनी मणिभद्र के २४ पुत्रों में से एक), ...४५३(मणिमन्त पर्वत : गरुडों द्वारा व्याप्त स्थानों में से एक), मत्स्य २२.३९(मणिमती नदी : श्राद्ध हेतु प्रशस्त तीर्थों में से एक), वायु ३३.१६(मणीचक : हव्य के शाकद्वीप के स्वामी पुत्रों में से एक), ३६.१८(मणिशील : अरुणोद मन्दर के पूर्व में स्थित पर्वतों में से एक), ४३.२८(मणिवप्रा : भद्राश्व देश की मुख्य नदियों में से एक), ४३.२९(मणितटा : भद्राश्व देश की नदियों में से एक), ५०.२९(तृतीय तल में मणिमन्त नाग के पुर की स्थिति का उल्लेख), ६७.७३/..७४(अर्जुन द्वारा देवों से अवध्य मणिवर्त निवासी करोड दैत्यों के वध का उल्लेख), ६९.१५४/..१४९(मणिदत्त : मणिभद्र पुण्यजनी के यक्ष पुत्रों में से एक), ९९.२२२/.३७.२१७(मणिवाहन : विद्योपरिचर वसु गिरिका के पुत्रों में से एक, अपर नाम कुश), विष्णु .२४.६६(मणिधान्यक वंश के भविष्य के राजाओं के जनपदों के नाम ) mani- 

मणिकर्ण शिव .२२.१४(मणिकर्णिक तीर्थ का वर्णन), स्कन्द ..३२.१६९ (मणिकर्णेश : शिव शरीर के वाम कर का रूप), ..५७.१०८(मणिकर्ण गणपति का संक्षिप्त माहात्म्य), लक्ष्मीनारायण .५५४.१४(मणिकर्ण तीर्थ में किराती की मोक्ष प्राप्ति ) manikarna

मणिकर्णिका मत्स्य १८२.२४(मणिकर्णिका में देह त्याग से इष्ट गति प्राप्त करनेv का उल्लेख), शिव .२२.१४(मणिकर्णिका की उत्पत्ति मणिकर्णिका में ब्रह्मा की उत्पत्ति), स्कन्द ...(काशी में विश्वनाथ के दर्शन से पूर्व मणिकर्णिका में स्नान का विधान), ...७९(मणिकर्णिका तीर्थ की निरुक्ति), ..२६.६३ (काशी में मणिकर्णिका की उत्पत्ति का वर्णन), ..३०.८४(मणिकर्णिका में सायुज्य मुक्ति प्राप्ति का उल्लेख), ..३३.(मणिकर्णिका का माहात्म्य : कलावती माल्यकेतु राजा का वृत्तान्त), ..३३.१०९(मणिकर्णिका का वर्णन), ..३४.(मणिकर्णिका का माहात्म्य, कलावती द्वारा मणिकर्णिका का स्मरण), ..६१.५०(मणिकर्णिका तीर्थ का माहात्म्य), ..६१.८६ (मणिकर्णिका देवी के स्वरूप का कथन), ..८४.९०(मणिकर्णिका के माहात्म्य का वर्णन), ..१६(मणिकर्णेश्वर का माहात्म्य, मणिकर्णिका नामक स्त्री द्वारा स्नान से सुस्वरूप प्राप्ति ) manikarnikaa

 

मणिकुण्डल ब्रह्म २.१००/१७०(गौतम द्वारा वैश्य सखा मणिकुण्डल के धन का हरण व चक्षु छेदन किए जाने पर विभीषण द्वारा मणिकुण्डल की चिकित्सा, महाराज राजा की कन्या से विवाह ) manikundala

 

 

मणिग्रीव गर्ग १.१९.२७(देवल के शाप से मणिग्रीव का अर्जुन वृक्ष बनना), ७.२४.१(कुबेर - पुत्र मणिग्रीव का प्रद्युम्न - सेनानी चन्द्रभानु से युद्ध), भविष्य ३.२.९.९(मदपाल वैश्य के पुत्र मणिग्रीव व कामालसा की कथा), भागवत १०.९.२३(नारद के शाप से वृक्ष बने कुबेर - पुत्र मणिग्रीव का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण १.३२१.११३(शूद्रजातीय मणिग्रीव द्वारा पुरुषोत्तम मास में दीपदान आदि करने से दारिद्र्य नाश व चित्रबाहु राजा के रूप में पुन: जन्म लेने की कथा ) manigreeva/ manigriva

 

मणिदेव भविष्य ३.३.३०.७३(पूर्वजन्म में मणिदेव यक्ष की प्रिया पद्मिनी का वर्णन ) manideva

 

मणिधर ब्रह्माण्ड १.२.१८.१२(विशोक नामक देवारण्य में मणिधर यक्ष के निवास का उल्लेख), १.२.३६.२१६(मणिधर यक्ष के पिता रजतनाभ का संदर्भ), मत्स्य १२१.१३(मणिधर यक्ष का विशोक वन में हेमशृङ्ग पर्वत पर वास ) manidhara

 

मणिनाग ब्रह्म २.२०(शेष नाग - पुत्र, तप द्वारा गरुड से अभय प्राप्ति, गरुड का रोष), स्कन्द ५.३.७२.३६(मणिनाग तीर्थ का माहात्म्य, कद्रू- विनता - उच्चैःश्रवा की कथा, कद्रू के शाप विनाशार्थ मणिनाग द्वारा तप करके लिङ्ग की स्थापना),

 

मणिपर्वत वायु ३७.१६(विकङ्क व मणिशैल के बीच स्थित चम्पक वन का संदर्भ), विष्णु ५.२९.१०(नरकासुर द्वारा मन्दर के शृङ्ग मणिपर्वत के हरण का उल्लेख), ५.२९.३४(श्रीहरि द्वारा मणिपर्वत आदि को गरुड पर आरोपित करके ले जाने का उल्लेख ) maniparvata

 

मणिपूर गणेश १.३७.४३(त्रेतायुग में पुष्पक नगर की मणिपूर नाम से ख्याति का उल्लेख), भविष्य ३.२.२८.२(मणिपूर के राजा चन्द्रचूड द्वारा सत्यनारायण की भक्ति), वराह १४८.६४(धूतपाप होने तक मणिपूर पर्वत से धारा पतन न होने का उल्लेख), १४९.६०(मणिपूर से चक्र तीर्थ पर ५ धाराओं के पतन का उल्लेख), स्कन्द ५.२.१०.५(माता के शाप से त्रस्त शङ्खचूड नाग के मणिपूर जाने का उल्लेख), महाभारत आश्वमेधिक ८०.४१(मणिपूर के राजा बभ्रुवाहन तथा संजीवनी मणि का प्रसंग ) manipoora/ manipura

 

मणिप्रदीप स्कन्द ४.१.३३.१५७(मणिप्रदीप नाग का संक्षिप्त माहात्म्य), ४.२.६८.८१(मणिप्रदीप नाग के समक्ष मणिकुण्डल का संक्षिप्त माहात्म्य ) manipradeepa/ manipradipa

 

मणिबन्ध विष्णुधर्मोत्तर २.१०९(विभिन्न प्रकार की आथर्वण मणियों के खनन व मन्त्र सहित बन्धन की विधि ) manibandha

 

मणिभद्र ब्रह्माण्ड २.३.७.१२०(रजतनाभ व मणिवरा - पुत्र, पुण्यजनी व देवजनी - पति, पुत्रों के नाम), मत्स्य १२१.८(चन्द्रप्रभ पर्वत पर मणिभद्र यक्ष का निवास), वामन १७.३(यक्षराज मणिभद्र से वट वृक्ष की उत्पत्ति), वायु ४७.७ (यक्ष - सेनापति मणिभद्र का चन्द्रप्रभ गिरि पर निवास), ६९.१५२(रजतनाभ व भद्रा - पुत्र, पुण्यजनी पति, मणिभद्र यक्ष के पुत्रों व कन्याओं के नाम), विष्णुधर्मोत्तर ३.७३.१३(मणिभद्र की मूर्ति का रूप), शिव २.२.३७.५३(दक्ष यज्ञ के विध्वंस में मणिभद्र द्वारा भृगु की दाढी मूंछ नोचने का उल्लेख), ४.१७.६(मणिभद्र नामक गण द्वारा चन्द्रसेन को चिन्तामणि भेंट करने का कथन), स्कन्द १.२.६२.३५(निधियों में मणिभद्र जाति के क्षेत्रपालों की स्थिति का उल्लेख), ३.३.५(मणिभद्र द्वारा चन्द्रसेन राजा को चिन्तामणि प्रदान करना?), ५.२.७५(मणिभद्र द्वारा पुत्र वडल को शाप देने व शापमुक्त करने की कथा), ६.१९, ६.१५५+ (कृपण व कुरूप क्षत्रिय मणिभद्र द्वारा पुष्प ब्राह्मण का अपमान, पुष्प द्वारा सूर्य आराधना से मणिभद्र की पत्नी पर अधिकार, मणिभद्र को राजा से मृत्युदण्ड की प्राप्ति), वा.रामायण ७.१२(कुबेर - अनुचर मणिभद्र का धूम्राक्ष से युद्ध, पार्श्व मौलि नाम प्राप्ति), ७.१५.१५? (कुबेर अनुचर महायक्ष मणिभद्र का धूम्राक्ष व रावण से युद्ध, पार्श्व मौलि नाम प्राप्ति), कथासरित् २.५.१६५(शक्तिमती द्वारा मणिभद्र यक्ष की मूर्ति से प्रतिष्ठित मन्दिर में पर स्त्री के साथ बन्द अपने पति समुद्रदत्त की रक्षा का प्रसंग), १८.२.३(धनद - भ्राता मणिभद्र की गेहिनी मदनमञ्जरी को खण्डकापालिक द्वारा वश में करने के यत्न का वृत्तान्त ) manibhadra

 

मणिमान् पद्म ३.२५.७(मणिमान् तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य : अग्निष्टोम फल की प्राप्ति), भागवत ४.४.४(त्रिनेत्र शिव के अनुचरों में से एक), ४.५.१७(दक्ष यज्ञ विध्वंस के समय मणिमान् द्वारा भृगु ऋषि को बांधना), वायु ६९.१५८/ २.८.१५३(मणिवर व देवजननी के यक्ष पुत्रों में से एक ) manimaan

 

मणिवक्त्र मत्स्य ५.२२(आप नामक वसु के चार पुत्रों में से एक),

 

मणिवर हरिवंश १.६.३३(मणिवर - पिता रजतनाभ को दोग्धा बनाकर यक्षों द्वारा पृथिवी को दुहने का वर्णन),

 

मण्डप अग्नि ५६(मण्डप निर्माण विधि), ९५.१७(लिङ्ग प्रतिष्ठा हेतु मण्डप प्रकार व निर्माण विधि), ब्रह्माण्ड ३.४.३४.८५(सहस्रस्तम्भ मण्डप), भविष्य २.३.१२(मण्डप प्रतिष्ठा विधान), मत्स्य २७०(२७ प्रकार के मण्डपों के नाम, स्वरूप भेद, निर्माण विधि), स्कन्द १.१.२४(शिव विवाह  मण्डप का वर्णन), २.४.३२(तुलसी निमित्त मण्डप), २.४.३३.५४(द्वादशी पूजा निमित्त मण्डप निर्माण का उल्लेख), ४.२.७९.५६(काशी में निर्वाण, मुक्ति, ज्ञान, शृङ्गार, ऐश्वर्य मण्डपों का माहात्म्य), ४.२.९८.८२+ (मुक्ति मण्डप, शृङ्गार आदि मण्डपों  का माहात्म्य), योगवासिष्ठ ३.१५(मण्डप उपाख्यान), ६.२.८(माया मण्डप), ६.२.९३(आकाश मण्डप), लक्ष्मीनारायण २.१९(कृष्ण की द्वितीय जन्म तिथि पर मण्डप निर्माण का वर्णन), २.२३४(कृष्ण की १५वीं जयन्ती उत्सव हेतु विश्वकर्मा द्वारा मण्डप निर्माण का वर्णन), २.२७८.३०(मण्डप द्वारा मुक्त स्वरूप दिखाकर स्वयं कृष्ण गृह में मण्डप बनने का वर्णन), २.२७९+ (विभिन्न मण्डप व उनके उपयोग), ४.४१.९०(कृष्ण की २१वीं जन्म तिथि पर मण्डप निर्माण का उल्लेख ) mandapa

 

मण्डल अग्नि २९(मन्त्र साधन हेतु सर्वतोभद्र मण्डल निर्माण), ३०(सर्वतोभद्र मण्डल पूजा विधान), १३०(७ - ७ नक्षत्रों के आग्नेय, वायव्य, दारुण, माहेन्द्र नामक ४ मण्डलों में उत्पातों के विभिन्न देशों पर प्रभावों का कथन), १४३+ (कुब्जिका पूजा हेतु मण्डल), ३१८(गणपति पूजा के संदर्भ में विघ्नमर्द मण्डल का कथन), ३१९(समण्डल वागीश्वरी पूजा का कथन), ३२०(सर्वतोभद्र आदि ८ प्रकार के मण्डलों की रचना विधि), गरुड १.८(मण्डल निर्माण विधि), १.१२६(मण्डल पूजा विधि), नारद १.२८.३२(श्राद्ध हेतु चार वर्णों के लिए मण्डलों के स्वरूपों का कथन), ब्रह्मवैवर्त्त १.२(गोलोक व वैकुण्ठ मण्डलों के अन्दर रासरासेश्वर कृष्ण के ज्योति स्वरूप का वर्णन), ब्रह्माण्ड १.२.२१.२०(मण्डलों के वर्णन के अन्तर्गत पृथिवी के मण्डल के रूप में घनोदधि, घनतेजा, घनवायु आदि का कथन), भविष्य १.१८७.१७(सूर्य के खखोल्क नामक मण्डल के महत्त्व का कथन), १.२०५.१(आदित्य हेतु मण्डल पूजा विधि, मण्डल देवताओं सहित भास्कर पूजा वर्णन के अन्तर्गत पूजा के वैदिक मन्त्र), २.१.२१(मण्डल निर्माण के विविध नाम), २.२.१+ (सूर्य की पीठिकाओं के क्रौञ्च आदि मण्डलों के विस्तार का वर्णन), २.२.२.१(सूर्य की पीठिका के परित: क्रौञ्च मण्डल निर्माण की विधि), २.२.२.४७(सुभद्र मण्डल निर्माण विधि), २.२.१०+ (वास्तुमण्डल निर्माण, देवार्चन आदि), ४.४४(आदित्य मण्डल दान व प्रतिग्रहण विधि), मत्स्य १७.३९(श्राद्ध के अवसर पर मण्डल ब्राह्मण आदि के पठन का निर्देश), १०४.९(प्रयाग में श्रीहरि द्वारा मण्डल की रक्षा का उल्लेख), १०८.९(प्रयाग के ५ योजन विस्तीर्ण मण्डल में प्रवेश पर अश्वमेध फल प्राप्ति का कथन), १११.८(वही), ११४.५६(भारत के पर्वतों के आश्रित जनपदों में  से एक), २५३(वास्तु मण्डल में देवों की स्थापना), २६२.६(मण्डला : पीठिकाओं के भेदों में से एक), २६२.१७(मण्डला रूपा पीठिका का फल : कीर्ति), २६५.२६(मूर्ति स्थापना के अवसर पर अध्वर्यु द्वारा मण्डलाध्याय आदि के जप का निर्देश), २६८(वास्तुमण्डल शान्ति विधि), वराह ९९.२२(विष्णु प्रीत्यर्थ द्वादशी तिथि को सर्वतोभद्र चक्र/मण्डल निर्माण की विधि), विष्णुधर्मोत्तर १.८८.८(ग्रहों व नक्षत्रों के मण्डलों के श्वेत आदि वर्णों का कथन), १.९४.१२(सर्वग्रह याग के अन्तर्गत ध्रुव के परित: मण्डल रचना का कथन), २.२९.१२(६४ पद वाले वास्तुमण्डल देवताओं का कथन), शिव ६.५(संन्यास मण्डल निर्माण की विधि का वर्णन), स्कन्द ३.२.३१.५८(धर्मारण्य की यात्रा के अन्तर्गत राम का एक रात्रि में माण्डलिक पुर में निवास का उल्लेख ), ७.१.१०.५(मण्डल तीर्थ का वर्गीकरण पृथिवी), लक्ष्मीनारायण २.१३८.७३(प्रासाद के गर्भ मध्य से आरम्भ करके २४ मण्डलों के देवताओं का कथन), २.१५१.७७(सर्वतोभद्र मण्डल पूजन विधि), २.१५८.२०(नव प्रासाद के समीप ८१ पद मण्डल में कुम्भ स्थापना विधि ) mandala

 

मण्डूक गणेश २.१९.६(कूप नामक दैत्य द्वारा मण्डूक रूप धारण कर गणेश के वध का यत्न), गरुड ३.२९.११(मण्डूकिनी : मण्डूक-भार्या, भागीरथी का अंश), गर्ग ५.२४.६०(मण्डूक देव द्वारा बलराम दर्शन हेतु तप, बलराम से भागवत संहिता की मांग), पद्म ७.९.९७(राजा सत्यधर्म व महिषी विजया द्वारा भेक योनि प्राप्ति तथा भेक द्वारा गङ्गा का स्मरण करते हुए मृत्यु को प्राप्त करने पर अश्वमेध फल की प्राप्ति का वृत्तान्त), ब्रह्माण्ड २.३.७.१२३(मणिभद्र व पुण्यजनी के २४ यक्ष पुत्रों में से एक), मत्स्य ५८.१८(तडाग आदि निर्माण के अन्तर्गत ताम्र मण्डूक आदि दान का निर्देश), वायु ६९.२९७/२.८.२८९(अनुवृत्ता-सन्तान), विष्णुधर्मोत्तर २.१२०.२४(अग्नि हरण से भेक योनि प्राप्ति का उल्लेख), स्कन्द २.१.२६.५९(तुम्बुरु - पत्नी को शाप से मण्डूकी योनि की प्राप्ति, अगस्त्य द्वारा घोण तीर्थ माहात्म्य वर्णन से मुक्ति), ४.२.७४.६२(शिव निर्माल्य भक्षिका भेकी का पुष्प वटु के गृह में गृध्रमुखी, गीत रहस्य ज्ञाता कन्या रूप में जन्म लेना व शिव लिङ्ग की ज्योति में लीन होना), ५.३.१९८.८०(माण्डव्य में देवी का माण्डुकी नाम), ६.९०.४३(मण्डूक द्वारा देवों को अग्नि का निवास बताना, शाप व उत्शाप प्राप्ति), ७.१.३६१(मण्डूकेश्वर लिङ्ग का माहात्म्य), महाभारत अनुशासन ८५.३०(मण्डूकों को अग्नि के शाप व देवों के वरदान का कथन), योगवासिष्ठ १.१८.४९(शरीर की मण्डूक से उपमा), ३.२४.५०(शुक्र के वाहन मण्डूक का उल्लेख), ५.५२.१४(मण्डूकि की मन से उपमा), लक्ष्मीनारायण १.३३७.४४(मण्डूकाक्ष : शङ्खचूड - सेनानी, मङ्गल से युद्ध), १.४७१(शिव मन्दिरस्थ माण्डूकी की कथा), १.४९५.३९(भेक/मण्डूक द्वारा अग्नि से शाप प्राप्ति), कथासरित् ३.६.७६(भेकों द्वारा देवों को अग्नि के जल में छिपे होने का रहस्योद्घाटन करने पर अग्नि द्वारा भेकों को शाप), ६.४.१३१(घट में रखे गए मण्डूक को जान लेने से हरिशर्मा को अपार धन की प्राप्ति ) mandooka/manduuka /manduka

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