पुराण विषय अनुक्रमणिका

PURAANIC SUBJECT INDEX

(From Mankati  to Mahaadhriti )

Radha Gupta, Suman Agarwal & Vipin Kumar

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Makara - Mangala ( Makara, Makha, Magadha, Magha, Mankana, Mankanaka, Manki, Mangala.)

Mangalachandi - Manikarnikaa  ( Mangalaa, Mani / gem, Manikarnikaa etc.)

Manikundala - Manduuka ( Manibhadra, Mandapa, Mandala, Manduuka / frog etc.)

Matanga - Matsyendranaatha  ( Matanga, Mati / intellect / intention, Matsya / fish etc.)

Matsyodari - Madanasundari ( Mathana, Mathuraa, Mada, Madana etc.)

Madanasundari - Madhu ( Madayanti, Madaalasaa, Madiraa / wine, Madra, Madhu / honey etc.)

Madhu - Madhya ( Madhu, Madhu-Kaitabha, Madhuchchhandaa, Madhusudana, Madhya / middle etc.)

Madhyandina - Manasvini (Madhyama / middle, Mana / mind, Manasaa etc.)

Manu - Manonuga ( Manu, Manojava etc. )

Manobhadra - Manahswaami ( Manoratha / wish, Manoramaa etc.)

Mantra - Manda ( Mantra, Manthana / stirring,  Mantharaa, Manda / slow etc.)

Mandagaa - Mandodari ( Mandara, Mandaakini, Mandira / temple, Mandehaa, Mandodari etc.)

Mandodari - Maya (Manthana / stirring, Manmatha, Manvantara, Mamataa, Maya etc. )

Mayuukha - Maru (  Mayuura / peacock, Mareechi, Maru etc. )

Maruta - Marudvati ( Maruta, Marutta etc.)

Marudvridhaa - Malla ( Marka, Markata / monkey, Maryaadaa / limit, Mala / waste, Malaya, Malla / wrestler etc. )

Mallaara - Mahaakarna ( Maha, Mahat, Mahaa etc. )

Mahaakaala - Mahaadhriti ( Mahaakaala, Mahaakaali, Mahaadeva etc. )

 

 

 

 

 

 

Puraanic contexts of words like Mantra, Manthana / stirring,  Mantharaa, Manda / slow etc. are given here.

मन्त्र अग्नि २५(ओं नमो भगवते वासुदेवाय आदि सबीज निर्बीज मन्त्रों का कथन), २९(मन्त्र साधन हेतु सर्वतोभद्र मण्डल निर्माण), ५८(प्रतिमा स्नान उपचार हेतु वैदिक मन्त्र), ५९.३२(द्वादशाक्षर वासुदेव मन्त्र का न्यास), ६३.(सुदर्शन पूजा हेतु मन्त्र), ६३.(नृसिंह विद्या मन्त्र), ६४(वरुण अभिषेक हेतु वैदिक मन्त्र), ८४+ (दीक्षा में कलाओं के अन्तर्गत मन्त्र प्रकार), ९१(मन्त्र में अक्षर संख्या से भविष्य ज्ञान, मन्त्र में देवता अनुसार बीजाक्षर), ९१.१४(सरस्वती, चण्डिका आदि के मन्त्रों के बीज मन्त्रों का कथन), ११७(श्राद्ध हेतु वैदिक मन्त्र), १२२.४१(अभिचार कर्म अनुसार मन्त्रों के प्रकार), १२४.(मन्त्र पीठ का कथन), १२५.(अभिचार कर्म हेतु कर्णमोटी विद्या मन्त्र का कथन), १२५.५४(हनुमान मन्त्र), १३३.१२(भैरव मन्त्र से शत्रुनाश), १३३.२६(पिच्छिका मन्त्र से शत्रु ाश), १३३.२९(भङ्ग विद्या मन्त्र से शत्रु नाश), १३३.३८(मृत्युञ्जय मन्त्र द्वारा दुष्टों का नाश), १३३.४४(भेलखि विद्या मन्त्र से शत्रु स्तम्भन), १३४(शत्रु नाश हेतु त्रैलोक्य विजया विद्या मन्त्र स्वरूप), १४२.१८(युद्धजयार्णव में मन्त्रौषधादि नामक अध्याय), १४४.(कुब्जिका देवी मन्त्र का कथन), १४६.(आठ अष्टक देवियों ब्रह्माणी, माहेश्वरी, कौमारी आदि के मन्त्र तथा उनसे उत्पन्न मातृकाओं के नाम), १५५.(षोढा स्नान के अन्तर्गत आप: परिमार्जन मन्त्रों का कथन), १६७.(यजमान के अभिषेक हेतु मन्त्र), २१४(मन्त्रमाहात्म्य नामक अध्याय में १० प्राणवायुओं का कथन ; मन्त्र जप की सम्यक् विधि), २१५(गायत्री मन्त्र अक्षर न्यास), २१९(राजा अभिषेक मन्त्र नामक अध्याय), २४५.११(धनुष की त्रैलोक्यमोहन मन्त्रों द्वारा पूजा का निर्देश), २५९(कामना सिद्धि हेतु वैदिक मन्त्र), २६०(कामना अनुसार यजुर्वेद मन्त्रों से होम का वर्णन), २६१(कामना अनुसार सामवेद मन्त्र जप), २६३.(श्रीसूक्त का महत्त्व), २६४.(देवपूजा में वैदिक मन्त्र), २६७.११(माहेश्वर स्नान के संदर्भ में हाथ में मणि बन्धन हेतु अक्रन्दयति सूक्त का निर्देश), २८४(मन्त्र रूप ओषधि का कथन), २९३(मन्त्र विद्या का वर्णन : प्रकार, भेद, लक्षण, साधक अनुसार मन्त्र निर्णय), २९३.१५(सिद्ध मन्त्र शोधन विधि), २९५(सर्प दंश चिकित्सा हेतु तार्क्ष्य मन्त्र का वर्णन), २९६(पञ्चाङ्ग रुद्र द्वारा दष्ट चिकित्सा के संदर्भ में पांच सूक्तों द्वारा पांच अङ्गों में रुद्रों का न्यास तथा रुद्राध्यायी के ऋषि, देवता, छन्द आदि का वर्णन), २९७(सर्प विष हरण मन्त्र), २९९.५०(बालग्रह शान्ति मन्त्र), ३०२.(वशीकरण हेतु चामुण्डा मन्त्र), ३०२.२७(गोकुल रक्ष हेतु त्र्यम्बक मन्त्र), ३०३(अष्टाक्षर नारायण मन्त्र उसके न्यास की विधि), ३०४(शिव पञ्चाक्षर मन्त्र दीक्षा विधान), ३०७(विष्णु हेतु त्रैलोक्य मोहन मन्त्र), ३०८(श्री दुर्गा मन्त्रों का वर्णन),  ३१२.(मन्त्रों में प्रस्ताव के भेदन से सिद्धि का कथन), ३१३(गणेश, त्रिपुरा भैरवी, ज्वालामालिनी, श्री, गौरी, नित्यक्लिन्ना मन्त्र), ३१५.(शत्रु स्तम्भनादि मन्त्र), ३१६(विभिन्न कामनाओं हेतु बीज मन्त्र), ३१७(सकल निष्कल आदि मन्त्रों के उद्धार के संदर्भ में हं, हिं, हुं आदि प्रासाद बीज मन्त्रों की व्याख्या), ३१८.(अघोरस्त्र मन्त्र का वर्णन), ३२२(पाशुपत मन्त्र द्वारा शान्ति), ३२३(गङ्गा मन्त्र, शिव मन्त्र राज, चण्डकपालिनी, क्षेत्रपाल बीज मन्त्र, सिद्ध विद्या, महामृत्युञ्जय, मृत सञ्जीवनी आदि मन्त्र), ३२३.२८(७० अक्षरों का ह्रदय/शिव मन्त्र), ३२५. (मन्त्र के सिद्ध आदि प्रकारों के परीक्षण की विधि, विभिन्न प्रकार के मन्त्रों के नाम, मन्त्र में देवों के अंशों का निर्धारण), ३२६.(गौरी के मू मन्त्र ओं ह्रीं : शाम् गौय्यब्द नम: का उल्लेख), ३२६.२३(मृत्युञ्जय के मूल मन्त्र ओं जूं : का कथन), ३४८(एकाक्षर कोश के अन्तर्गत वर्णों के अर्थ/हेतु), कूर्म .१८.६२(वैदिक मन्त्रों का स्नान काल में जप), गणेश .३८.१८(गृत्समद द्वारा स्वपुत्र को गणानां त्वा मन्त्र की शिक्षा), ..२०(अदिति द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु पञ्चाक्षर मन्त्र का जप), गरुड .४८(देव प्रतिष्ठा कार्य हेतु मन्त्र), .१०१(ग्रह शान्ति हेतु वैदिक मन्त्र), .२०६(स्नान हेतु वैदिक मन्त्र), .२०९(सन्ध्या कर्म हेतु मन्त्र), .२१०(पार्वण श्राद्ध में प्रयुक्त मन्त्र), .३०.२६(पिण्ड दान हेतु वैदिक मन्त्र), देवीभागवत .११(ऐं बीज मन्त्र पाठ से मूर्ख उतथ्य के विद्वान बनने की कथा), .१६(सुदर्शन राजकुमार द्वारा क्लीं मन्त्र जप से वैभव प्राप्ति की कथा), .४०.२८(देवी पूजार्थ हृल्लेखा/ह्री मन्त्र), नारद .१६.३६(अष्टाक्षर द्वादशाक्षर मन्त्र हेतु नारायण स्वरूप), .१९.१४(ध्वजारोपण हेतु होम में प्रयुक्त वैदिक मन्त्र), .२७(वेदों की ऋचाएं), .२९.७५(ऋचाएं), .६४(मन्त्रों के स्त्री, पुरुष आदि भेद, लक्षण, ४९ मन्त्र दोष, बीज अनुसार मन्त्र भेद, अक्षर अनुसार मन्त्र भेद), .६५.(मन्त्र शोधन विधि), .६६.७०(गायत्री के तीन कालों में स्वरूप का कथन), .६८(गणेश मन्त्र विधान का निरूपण), .६९.७३(मङ्गल, बुध बृहस्पति ग्रहों के लिए मन्त्र), .७०(महाविष्णु मन्त्र), .७१+ (नृसिंह, हयग्रीव, राम राम परिवार के मन्त्रों की अनुष्ठान विधि), .७३(राम हेतु मन्त्र), .७४(हनुमान मन्त्र), .७६(कार्तवीर्य मन्त्र), .८०(कृष्ण सम्बन्धी मन्त्रों की अनुष्ठान विधि), .८४(देवी मन्त्र), .८५(कालिका मन्त्र), .८६.(कालिका देवी का मन्त्र,यक्षिणी मन्त्र), .९१(महेश हेतु मन्त्र), पद्म ..५१(श्राद्ध हेतु वैदिक मन्त्र), .५९.१९७(रुद्राक्ष न्यास मन्त्र), .७०.५७(मन्त्र चूडामणि के सब मन्त्रों का कारण होने का कथन?), .८१(कृष्ण मन्त्र का वर्णन), .८०.१०३(नमो नारायण मन्त्र का माहात्म्य), .९३.(स्नान मन्त्र), .९५.१९(अतो देवा इति मन्त्र), .१२४.४५(अर्घ्य मन्त्र), .२२३.२३३(दिलीप वसिष्ठ संवाद में लक्ष्मी - नारायण मन्त्र), .२२३.४८(मन्त्र दीक्षा विधि, गुरु के लक्षण), .२२६.१८(अष्टाक्षर नारायण मन्त्र के ऋषि, देवता आदि), ब्रह्म .६४.(ब्रह्मा द्वारा माया से उत्पन्न प्रमदा के लिए ग्iiiवैदिक ऋचा अजामेकां का विनियोग), .७०.२२(यो जात एव प्रथमो इति वैदिक मन्त्र), .१००.६५(इषे त्व इति मन्त्र द्वारा विशल्यकरणी ओषधि की शाखा छिन्न करना), ब्रह्मवैवर्त्त .(सरस्वती मन्त्र), .(पृथिवी मन्त्र), ब्रह्माण्ड ..२८.९१(मन्त्रों द्वारा श्राद्धान्न को पितरों तक पंहुचाने का श्लोक), ..३२.६८(तपोरत ऋषियों से असंतोष आदि प्रकार से मन्त्रों के प्रादुर्भाव  का कथन), ..३३(मन्त्रों के भेद), ..३३.२८(ऋषि - पुत्रों द्वारा रचित वैदिक मन्त्रों के लक्षण), ..३३.३६(ऋग~, यजु, साम मन्त्रों के लक्षण), ..३३.४२(मन्त्रों के भेद २४ लक्षण), ..३५.७४(ऋक्, यजु के ग्राम्य, आरण्यक मन्त्र भेदों का उल्लेख), ..७१.२४७(मन्त्रवित् : सत्यभामा कृष्ण के पुत्रों में से एक), ...५१(अशुद्ध अन्न के भक्षण पर प्रायश्चित्त हेतु मन्त्र), ...५६(इदं विष्णु इति मन्त्र), ..३८.(वेद मन्त्रों, विष्णु मन्त्रों, दुर्गा मन्त्रों आदि का आपेक्षिक महत्त्व), ..३८.११(गदि कामराज मन्त्र), ..४४.५८(मन्त्रात्मशक्ति : वर्ण शक्तियों में से एक), भविष्य .२९(गणेश मन्त्र), .१३४.१२(सूर्य प्रतिष्ठा में मण्डल विधि के अन्तर्गत कलश स्थापन हेतु वैदिक मन्त्र), .१३५.२८(सूर्य प्रतिष्ठा के अन्तर्गत स्नान कृत्यो में प्रयुक्त होने वालेv वैदिक मन्त्र), .१३६.२९(अग्नि के गृह्य संस्कारों हेतु वैदिक मन्त्र), .१८७.२३(सूर्य के ओं नम: खषोल्क मन्त्र के महत्त्व का कथन), .१९९(सूर्य हेतु मन्त्र), .२०१(सूर्य हेतु मन्त्र), .२०२+ (सूर्य हेतु मन्त्र), .२०६(सूर्य हेतु मन्त्र), .२१४(सूर्य हेतु मन्त्र), ...३७(मन्त्र में अक्षर संख्या के अनुसार देवता रूप का निरूपण), ..२०(पूर्ण होम में प्रयुक्त वैदिक मन्त्रों के ऋषि, छन्द, देवता), ..(कलश स्थापना में विनियुक्त वैदिक मन्त्रों के ऋषि, देवता, छन्द), ..१०.४०(वास्तुयाग में देवताओं के लिए प्रयुक्त मन्त्रों के ऋषि, देवता, छन्द आदि), ..१०.४१(वास्तु देवताओं के संदर्भ में मन्त्रों के ऋषि, देवता विनियोग), ..१४(संस्कार यागों तथा शान्तिकर्मों में प्रयुक्त वैदिक मन्त्रों के ऋषि, देवता, छन्द आदि का विवरण), ..२०.२६(जलाशय प्रतिष्ठा के संदर्भ में अनुष्ठीय याग में विभिन्न कर्मों में प्रयुक्त वैदिक मन्त्र), ..२१.१२१(मध्यम प्रकार के याग में प्रयुक्त वैदिक मन्त्र), ..१६(वृक्षादि प्रतिष्ठा हेतु याग में प्रयुक्त वैदिक मन्त्र), ..२१.१४ (विष्णुशर्मा के चार पुत्रों द्वारा मृत संजीवनी विद्या के प्रभाव से व्याघ्र| को जीवित करनेv की कथा), .११८.७३(अगस्त्य: नमान: इति वैदिक मन्त्र), .१४१(ग्रहों के लिए वैदिक मन्त्र), भागवत .२०.१५(मन्त्रमाला : कुश द्वीप की नदियों में से एक), .१५.२७(मन्त्रोपनिषद् : नारद द्वारा चित्रकेतु को मन्त्रोपनिषद् प्रदान करनेv का कथन), ..(छठें चाक्षुष मन्वन्तर में इन्द्र के मन्त्रद्रुम नाम का उल्लेख), ११.११.४५(स्थण्डिल/मिट्टी की वेदी में मन्त्रह्रदय द्वारा विष्णु की उपासना का निर्देश), ११.२७.३१(पूजार्थ वैदिक मन्त्र), मत्स्य ४७.७५(देवों को हराने हेतु शुक्राचार्य द्वारा महादेv से अप्रतीप मन्त्र प्राप्ति का उद्योग), ९३.३१(नवग्रह शान्ति होम में प्रयुक्त वैदिक मन्त्र), १४५.६२(ऋषियों द्वारा तप के समय असन्तोष, भय आदि प्रकार के मन्त्रों के प्रादुर्भाव का कथन), २१५.४७(राजा द्वारा वाञ्छित कार्य हेतु मन्त्रियों से पृथक् - पृथक् मन्त्रणा करनेv सम्बन्धी कथन), २२०.३३(राजा के लिए मन्त्र के महत्त्व का कथन), लिङ्ग .३५.१८(त्र्यम्बकं यजामहे मन्त्र की व्याख्या), .८५(नम: शिवाय पञ्चाक्षर मन्त्र का माहात्म्य), .(द्वादशाक्षर मन्त्र का माहात्म्य : ऐतरेय द्वारा ऐश्वर्य प्राप्ति), .५०(अघोर मन्त्र द्वारा शत्रु नाश), .५३+ (मृत्युञ्जय मन्त्र का वर्णन), वराह ३७(नमो नारायण मन्त्र), १२०(सन्ध्या मन्त्र), वामन ६१(वासुदेव मन्त्र की देह में स्थिति), ९०.२४(मन्त्रों में विष्णु का पुरुषोत्तम नाम), वायु ५८.१४(मन्त्रप्रवचन : द्वापर में प्रवर्तित वैदिक शाखाओं में से एक), ५९.९७ (मन्त्रवादी मन्त्रकर्ता ऋषियों के नाम), ६७./..(ब्रह्मा के मुख से सृष्ट मन्त्र शरीर १२ देवों के नाम), .२२.३९(श्राद्ध हेतु वैदिक मन्त्र), ९६.२३८/ .३६.२३८(मन्त्रय : सत्यभामा कृष्ण के पुत्रों में से एक), विष्णुधर्मोत्तर .९५(ग्रह, नक्षत्र आवाहन मन्त्र), .१०२(ग्रह - नक्षत्रों के लिए होम मन्त्र), .१२४(विभिन्न कामनाओं की पूर्ति हेतु वैदिक मन्त्रों का विधान), .१२६(विभिन्न कामनाओं की पूर्ति हेतु सामवेद के मन्त्रों का विधान), .१२७(विभिन्न कामनाओं की पूर्ति हेतु अथर्वविधि से वैदिक मन्त्रों का विधान), .१६०(छत्र, केतु, गज, पताका, खङ्ग, चर्म, दुन्दुभि चाप हेतु मन्त्र), .९७+ (प्रतिमा प्रतिष्ठा हेतु मन्त्र), .१००(अर्चा शौच के अन्तर्गत २१ प्रकार की मृदाओं के शौच हेतु मन्त्र), .१११(प्रतिष्ठित भगवान् के बृहत् स्नान हेतु वैदिक मन्त्र), .११२+ (स्नान के पश्चात् विष्णु की अर्चना हेतु वैदिक मन्त्र), .२३५(प्रायश्चित्त हेतु वैदिक मन्त्र), शिव ..२१.३३(नारद द्वारा पार्वती को पञ्चाक्षर  मन्त्र का वर्णन), .१४.१२(प्रणवार्थ के स्वरूपों में एक मन्त्र स्वरूप का कथन), ..१२+ (श्रीकृष्ण उपमन्यु संवाद में शिव के पञ्चाक्षर मन्त्र की महिमा), ..१३.३८(पञ्चाक्षर मन्त्र नम: शिवाय की पञ्चाक्षरी विद्या के रहस्य का वर्णन), ..१४.२३(पञ्चाक्षर मन्त्र जप की विधि), ..१९(साधक संस्कार मन्त्र का माहात्म्य), स्कन्द ..६१.५५(गणपति मन्त्र), ..(वराह मन्त्र), ..२०.६०(पृथ्वी दान मन्त्र), ..२८(ब्रह्मा द्वारा इन्द्रद्युम्न को मन्त्र उपदेश), ..२९(द्वादशाक्षर बलभद्र मन्त्र), ..३१(नृसिंह मन्त्र), ...(दीप मन्त्र), ..१०.४४(बलि पूजा हेतु मन्त्र), ..३२.३१(अर्घ्य मन्त्र), ..३४.१३(अतो देवेति मन्त्र), ..२०(शिव - पार्वती संवाद के अन्तर्गत आथर्वण मन्त्रों के प्रकार कूटबीज मन्त्रों के भेद), ..(शिव पञ्चाक्षरी मन्त्र का माहात्म्य, दाशार्हराज का वृत्तान्त), ..२१(पञ्चाक्षर शिव मन्त्र के माहात्म्य का वर्णन), ..३५.९८(स्नानार्थ वैदिक मन्त्र), ..६८.७७ (त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति मन्त्र), ..७३.९५(त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति वैदिक मन्त्र), ..१२५(मन्त्रयुक्त पूजा का विधान), ..१३९.(मन्त्र जप का माहात्म्य), .३६(वैदिक मन्त्र), .१२४.६४ (सप्तर्षियों द्वारा वाल्मीकि को प्रदत्त हास्य मन्त्र), .१२९.२०(याज्ञवल्क्य द्वारा अभिषेक के लिए प्रयुक्त मन्त्र), .१३३.३९(क्षेत्रपाल मन्त्र), .१३७.(माण्डव्य द्वारा जपा गया विभ्राड इति मन्त्र), .१५७(आदित्य की पूजा हेतु वैदिक मन्त्र), .१६५.३४(ऋचीक द्वारा वरुण से श्यामकर्ण अश्वों की प्राप्ति हेतु अश्व वोढेति मन्त्र का जप), .२२४.१७(श्राद्ध मन्त्र), .२५६(शिव - पार्वती संवाद के अन्तर्गत द्वादशाक्षर मन्त्र का माहात्म्य), .२६२(शिव - पार्वती संवाद के अन्तर्गत ओम नम: भगवते वासुदेवाय द्वादशाक्षर मन्त्र में प्रत्यक्षर बीज का वर्णन), .१७(सूर्य पूजार्थ वैदिक मन्त्र), ..१७.६७(ग्रह पूजार्थ मन्त्र), ..१७.७२(देव पूजार्थ मन्त्र), ..१७.८०(सूर्य के षोडशोपचार हेतु मन्त्र), ..१७.१००(मेरु शृङ्ग पूजा हेतु मन्त्र), ..१७.१३६(सूर्य प्रदक्षिणा हेतु मन्त्र), ..२३.१११(चन्द्रमा के यज्ञ में यजु, साम आदि मन्त्र), ..८३.४४(खड्ग मन्त्र), ..२४३(मन्त्रावलि क्षेत्रपाल द्वारा हीरक क्षेत्र की रक्षा का उल्लेख), ..३४८(मन्त्रविभूषणा गौरी पूजन से दुःख निवृत्ति का उल्लेख), हरिवंश .२८(विषनाशक गरुड मन्त्र का वर्णन), .१+ (सन्तान गोपाल मन्त्र), योगवासिष्ठ .६९.१४(विषूचिका बीज मन्त्र का कथन), .३१(नारायण मन्त्र), लक्ष्मीनारायण .१७६.८१(शम्भु द्वारा वीरभद्र को प्रदत्त कालकवल मन्त्र का कथन), .४७.९३(ओं नमो श्री कृष्ण नारायणाय पत्ये स्वाहा मन्त्र का देह में न्यास), .१५६.५४(देवप्रतिमा स्नान के समय विभिन्न उपचारों हेतु वेदमन्त्रों का उल्लेख), .१५९.(मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के संदर्भ में विविध वैदिक मन्त्रों का विभिन्न कर्मों में विनियोग), .१६०.९७(चल मूर्ति प्रतिष्ठा के संदर्भ  में ध्रुवा द्यौ इति वैदिक मन्त्र का उल्लेख), .२१२.३७(पूर्णाहुति होम के संदर्भ में समुद्रादूर्मिर्मधुमां इत्यादि विभिन्न वैदिक मन्त्रों का उल्लेख), .२२०.७६(मन्त्राग्निक : अन्त:प्राक् नगरी के राजा आण्डजरा के गुरु), .२३५.८८(मन्त्रिका : तामसाक्षि - कन्या, चाण्डाल जाति के मन्त्रों की आर्षी), ..८०(सर्प नाशक मन्त्र), .६२.३९(ओम, कृष्ण, श्रीकृष्ण आदि विभिन्न अक्षर संख्याओं वालेv मन्त्रों के फलों का वर्णन), .६८.१२(अनादि श्रीकृष्ण नारायण इति मन्त्र की विभिन्न व्याख्याएं, मन्त्र ग्रहण के अधिकारी गण तथा मन्त्र माहात्म्य का वर्णन), .६९.(मन्त्र दीक्षा विधि वर्णन के अन्तर्गत देह में चिह्नों का धारण, जप हेतु विभिन्न गायत्री मन्त्र), .७०.२७(मन्त्रों के आदि अक्षर के तीन अक्षरों , तथा की विभिन्न प्रकार से व्याख्या), .१५०.५६(हनुमान मन्त्र), कथासरित् १२..४७(राजा भद्रबाहु के मन्त्री मन्त्रगुप्त द्वारा स्व बुद्धि बल से राजा को वाञ्छित कन्या की प्राप्ति कराने का वृत्तान्त ), द्र. सुमन्त्र mantra 

मन्त्रनाथा ब्रह्माण्ड ..१७.२२(संकेत योगिनी मन्त्रनाथा के महत्त्व का वर्णन), ..१९.६१(भण्डासुर को जीतने हेतु मन्त्रिनाथा देवी की गीति चक्र में स्थिति का उल्लेख), ..३१.८२(मन्त्रिनाथा देवी के मन्दिर/भवन का वर्णन, मातङ्ग मुनि को वरदान, मातङ्ग मुनि की कन्या के रूप में जन्म ) mantranaathaa/ mantranathaa 

मन्त्री पद्म ..४८(आकाश, वायु आदि पञ्च तत्त्वों के अमात्यों कर्ण, चर्म आदि का कथन), विष्णुधर्मोत्तर ..(राजा के मन्त्री के लक्षण), महाभारत शान्ति ८०.२१(मन्त्री के लक्षण), वा.रामायण .(दशरथ के मन्त्रियों के गुणों का वर्णन), लक्ष्मीनारायण .२२१.६०(बालकृष्ण का बाल्यरज नृप की नगरी मन्त्रिणांगां में आगमन राजा द्वारा स्वागत आदि ) mantree/ mantri 

मन्थ भागवत .१५.१५(मन्थु प्रमन्थु : वीरव्रत भोजा - पुत्र, मन्थु के पुत्र का उल्लेख ) mantha 

मन्थन देवीभागवत .१०.२३(व्यास द्वारा अरणि मन्थन से पुत्र प्राप्ति का कथन), ब्रह्माण्ड ...२९( x तत्त्वों के मन्थन सम्बन्धी कथन), भागवत १०.४६.४४(गोपियों द्वारा वास्तुपूजन के पश्चात् दधि मन्थन का उल्लेख), स्कन्द ..२६.२१(दक्ष शाप से अन्तर्हित चन्द्रमा को लाने हेतु विष्णु द्वारा समुद्र मन्थन का उपक्रम), ..१०३.९९(आमावास्या को दधि मन्थन का निषेध ), द्र. समुद्रमन्थन manthana 

मन्थरा गर्ग .१७.१५(राधा कृष्ण के विरह पर ललिता यूथ की गोपियों द्वारा त्रेता की मन्थरा द्वापर की कुब्जा में साम्य द्वारा उपालम्भ), भविष्य ..१७.१४(मन्थर : अश्वाग्नि का नाम), स्कन्द ..१०.(मन्थरक नामक कूर्म से इन्द्रद्युम्न की भेंट), वा.रामायण .२५.२०(इन्द्र द्वारा विरोचन - पुत्री मन्थरा का वध), लक्ष्मीनारायण .२५.५२(भगवान् के पदों की गति में मन्थरा होने का उल्लेख), कथासरित् १०..७९(मन्थरक नामक कूर्म की काक, मूषक हरिण से मित्रता का वृत्तान्त), १२..२८९(ध्यानपारमिता के संदर्भ में मलयमाली वणिक् - पुत्र द्वारा मन्थरक नामक मित्र द्वारा दिए गए चित्र को वास्तविक समझने का वृत्तान्त ) mantharaa 

मन्थु भागवत .१५.१५(वीरव्रत भोजा - पुत्र, सत्या - पति, भौवन - पिता, गय/भरत वंश ), द्र. वंश भरत manthu 

मन्द गर्ग .११.१२(बलि - पुत्र मन्दगति का त्रित मुनि के शाप से कुवलयपीड हाथी बनना), पद्म .११७.२३३(सोम वैश्य के पुत्र मन्द द्वारा घण्टा को उपहत करनेv का कथन), ब्रह्माण्ड ..१८.(मद नामक कुमुद्वत् र से मन्दाकिनी नदी के नि:सृत होने का उल्लेख), ...३३०(अभ्रमु हस्तिनी के पुत्रों में से एक), ..७१.१६७(मन्दबाह्य : बलराम के पुत्रों में से एक), ..७१.१८१ (मन्दक : श्रीदेवा वसुदेव - पुत्र), भविष्य ..२५.४०(ब्रह्माण्ड पद से उत्पन्न मन्द द्वारा धर्मसावर्णि मन्वन्तर की सृष्टि का उल्लेख), मत्स्य १२१.(कैलास पर्वत पर मन्दोदक सरोवर की महिमा का कथन), १७१.५४(मन्दपन्नग : मरुत्वती कश्यप के मरुद्गण संज्ञक पुत्रों में से एक), मार्कण्डेय .३२(मन्दपाल ब्राह्मण के पुत्रों में द्रोण द्वारा तार्क्षी से पुत्रों को उत्पन्न करनेv का वृत्तान्त), वायु ४७.(कैलास के पाद से कुमुदों के मन्द नामक जल से मन्दाकिनी नदी की उत्पत्ति का उल्लेख), ५०.१५१(सूर्य चन्द्रमा की मन्दा शीघ्र गतियों का कथन), ६९.२१४/..२०८(श्वेता/अभ्रमु हस्तिनी के पुत्रों में से एक), ६९.२१६/..२१०(पद्म संज्ञक मन्द हस्ती के ऐलविल/कुबेर का वाहन होने का उल्लेख), ९६.१६५/.३४.१६५(मन्दवाह्य : सारण के पुत्रों में से एक), विष्णु ..६९(शाकद्वीप में शूद्रों की मन्दग संज्ञा का उल्लेख), कथासरित् १०..१२६(मन्दविसर्पिणी यूका/जूं द्वारा टिट्टिभ नामक खटमल से मित्रता करनेv के कारण मृत्यु को प्राप्त होने का वृत्तान्त ) manda

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